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गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012

विलासराव की शर्मनाक करतूत



अवैध तरीके से दी थी सुभाष घई को जमीन
( शैलेष जायसवाल )
   फिल्म निर्माता सुभाष घई को अवैध तरीके से जमीन देने के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख की करतूत को शर्मनाक बताते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने घई को गोरेगांव फिल्मसिटी में स्थित उनकी साढे १४ एकड की जमीन तुरंत राज्य सरकार को लौटाने को कहा है। जबकि शेष साढे ५ एकड जमीन को ३१ जुलाई २०१४ तक लौटाने का समय दिया गया है। जबकि इस फैसले के खिलाफ घई ने सुप्रिम कोर्ट में जाने का पैâसला किया है। 
   अदालत के इस नतीजे से विलासराव देशमुख पर संकट के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं। लातूर के रहनेवाले राजेन्द्र सोनटके और अन्य ४ व्यक्तियों द्वारा दायर किए गए इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि विलासराव देशमुख ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए सन २००० में सुभाष घई को अवैध तरीके से गोरेगांव फिल्मसिटी की जमीन आवंटित की थी। यह आरोप अदालत में साबित होने के बाद कल गुरूवार को न्यायाधीश मोहित शाह और गिरिश गोडबोले की न्यायपीठ ने उक्त पैâसला सुनाया। बता दें कि उक्त जमीन पर सुभाष घई की कंपनी मुक्ता आर्टस् एवं विस्टलिंग वुड्स इंटरनैशनल का कब्जा है। इस पर आधी से ज्यादा जमीन पर फिल्म की शुटिंग और एडीटिंग होती है। जबकि इसी के साढे ५ एकड जमीन पर घई ने फिल्म इंस्टिट्युट खोला है।  जिसमे फिल्म निर्माण और अभिनय संबधी कलाकारों को शिक्षा दी जाती है। फिलहाल इसमें शिक्षा ले रहे छात्रों की पढाई पूरी होेने तक का अदालत ने समय दिया है। जो कि ३१ जुलाई २०१४ को खत्म होगा। जबकि २०१४ के लिए नए एडमिशन लेने के लिए अदालत ने रोक लगा दी है।
२००० में राज्य सरकार और सुभाष घई के बीच हुए करारनामा के मुताबिक जमीन का सालाना ५.३ करोड रू. किराया सरकार को दिया जाना था। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सुभाष घई ने कहा है कि अदालत के फैसले का उन्हें आदर है, मगर वे कहीं भी गलत नहीं हैं। २००० से लेकर अबतक जमीन का किराया नियमित रूप से सरकार को दिया जाता रहा है। इसलिए इस फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रिम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

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