...

गुरुवार, 18 जुलाई 2013

१८७६ सरकारी कर्मचारी होंगे बेघर

अतिक्रमण करनेवाले कर्मचारियों को सरकारी नोटीस

शैलेष जायसवाल / मुंबई 
    गोरेगांव पूर्व के आरे कॉलोनी के जंगलों में रहनेवाले सरकारी मुलाजिमों पर अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए आरे एवं राज्य प्रशासन ने अतिक्रमण पर कारण बताओ नोटीस जारी किया हैं। सही कारण नहीं मिलने पर जगह को खाली करने का निर्देश भी आरे प्रशासन ने दिया हैं। जिससे बेघर होने के डर से स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त हो गया हैं। नाराज सरकारी कर्मियों ने आखिरकार सरकार के ही खिलाफ बगावत का बिगुल बजा दिया हैं। 
    आरे विभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक र. जाधव ने बताया कि सरकारी आदेश पर ही उक्त कार्रवाई की गई है। हालांकि अभी और भी अतिक्रमण करनेवाले लगभग दो हजार सरकारी कर्मचारियों को नोटीस भेजा जाएगा। जाधव के मुताबिक यह कार्रवाई आरे कॉलोनी के विकास मुद्दे को ध्यान में रखकर की जा रही हैं। दोपहर का सामना को जानकारी देते हुए अनिल म्हसकर ने बताया कि प्रशासन ने अबतक १८७६ कर्मचारियों को नोटीस भेजा हैं। उक्त सभी कर्मचारी सन १९५० से वहां झोपड़ियों में रह रहे हैं। उस समय सरकार ने उन्हें कोई रहने की व्यवस्था नहीं की थी। जिसके लिए मजबूरन प्रतिकुल स्थिती में आरे के खतरनाक जंगलों में वे रहकर गुजारा करने लगे थे। 
    एक ओर सरकार १९९५ से पहले की झोपड़ियों को संरक्षण देकर उनका पुनर्वसन कर रही है, तो दूसरी ओर १९५० से भी पहले से आरे के झोपड़पट्टियों में रह रहे सरकार के ही मुलाजिमों के  साथ यह दूजा भाव क्यों? इस बात को लेकर सवालियां निशान खड़ा हो गया हैं। इस बात को लेकर आरे कर्मचारियों में तीव्र नाराजगी का माहौल है। हालांकि इस मुद्दे को लेकर स्थानीय शिवसेना विधायक रवींद्र वायकर ने आगामी अधिवेशन में हंगामा खड़ा करने का मन बना लिया हैं। वायकर के मुताबिक आरे विभाग में अब भी अवैध तरिके से व्यावसायिक बांधकाम जारी हैं। जिन्हें रोक लगाने के लिए कोई ठोस कदम सरकार ने नहीं लिए। प्रशासन अगर चाहे तो टोल नाकों पर ही रेती और सिमेंट की गाडियों को रोक दिया जाए, ताकि अवैध अतिक्रमण पर रोक लग सके। लोगों ने कहा हैं कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे सरकार के खिलाफ विधान भवन के सामने आंदोलन करेंगे। 

कोई टिप्पणी नहीं: