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शनिवार, 10 मई 2014

संसर्गजन्य रोगी नहीं कर सकेंगे मेट्रो में सफर



मुंबई.  काफी इंतजार के बाद मेट्रो अब मुंबईकरों के लिए शुरू होने की खबर मिलते ही लोगों में उत्साह देखने को मिल रहा हैं। वहीं दूसरी ओर मेट्रों के नियमों के लेकर कुछ लोग नाराज हुए हैं। मेट्रो प्रशासन ने अपने मेट्रो रेल एक्ट में यह प्रावधान रखा है कि संसर्गजन्य रोग से पीड़ित व्यक्ति मेट्रो से यात्रा नहीं कर सकेँगे । ऐसे बीमार यात्रियों को स्टेशन परिसर से ही बाहर निकालने का अधिकार एक्ट में लागू किया गया हैं।  

प्रशासन के इस फैसले को लेकर कुछ सेवाभावी संस्थाओं ने भी विरोध प्रकट किया हैं। समाजसेवकों ने मेट्रो प्रशासन को लिए गए पत्र में कहां है कि भले ही बीमारों के लिए अलग डिब्बे की व्यवस्था की जाए, पर उन्हें मेट्रो में सफर न करने देना सरासर गलत है। इससे कईयों की भावनाओं को भी आहत पहुंचेगी। मानव विकास सेवा संस्था ने भी प्रशासन और सरकार से निवेदन किया हैं कि वे मेट्रो एक्ट के कानूनों में कुछ संशोधन करें। 

मेट्रो रेल शुरू होने में भले ही समय लगा हो, पर इसकी सुरक्षा और रखरखाव के लिए काफी सुविधाएं एवं कड़े नियम बनाए गए हैं। स्टेशन पर या आस-पास के इलाके में अनहोनी घटना को अंजाम देनेवालों के लिए मेट्रो रेलवे एक्ट में कई नए कानून बनाए गए हैं। शराब पीकर यात्रा करनेवाले तथा अशांति पैâलानेवालों पर भी पाबंदी लगाई गई हैं। उसी प्रकार मेट्रों में कोई भी वस्तु या सामग्रियों की विक्री करनेवालों पर भी पाबंदी लगाई गई हैं। ऐसा करने पर ५०० रूपए जुर्माना या छह माह की कैद होगी। वहीं अन्य यात्रियों को हानी हो सके ऐसे सामान लेकर यात्रा करनेवालों ५०० रूपए का जुर्माना लगाया गया हैं। वहीं लोकल ट्रेनों में छत पर यात्रा करनेवाले स्टंटबाज टपोरियों पर अंकुश लगाने के लिए मेट्रो प्रशासन ने अहतियात बरतना शुरू कर दिया हैं। स्टंटबाजी करनेवाले टपोरियों को प्रशासन ने ५० रूपए का जुर्माना लागू करने का प्रावधान रखा हैं।  

मुंबई में अबतक किसी भी बात को लेकर लोकल ट्रेन रोक कर आंदोलन किए जाते रहे हैं। ऐसे में इसी सीख को लेकर मेट्रो प्रशासन ने आंदोलनों से मेट्रो न रूके इसके लिए भी कुछ खास इंतजाम किए हैं। साथ ही डिब्बों के अंदर विज्ञापन चिपकाकर मेट्रो की सुंदरता एवं स्वच्छता को नष्ट करनेवालों को ५० रूपए दंड एवं एक महिने की जेल का भी प्रावधान रखा गया हैं। वहीं मेट्रों में जबरन घुसकर ट्रैक पर उतरने तथा रेल रोकने का प्रयास करनेवालों को तो ५०० रूपए दंड या छह माह की कैद हो सकती हैं।  वहीं ’मेट्रो रोको’ आंदोलन करनेवालों पर तो ५ हजार रूपए जुर्माना एवं चार साल की कैद का कानून लगाया गया हैं। इतना ही नहीं मेट्रो के कर्मचारियों से दुव्र्यवहार करनेवाले तथा कर्मचारियों के कामकाज में अडचन पैदा करनेवालों को भी एक हजार रूपए जुर्माना या एक साल की कैद होगी। 

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