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मंगलवार, 22 जुलाई 2014

बंद भंगार जीप ने पिया लाखों का डिजेल

अंजुमन-ए-इस्लाम में फर्जी घोटाले का खुलासा

मुंबई. भायखला में स्थित अंजुमन-ए-इस्लाम द्वारा संचालित साबू सिद्दिक पॉलिटेक्निक स्कीम के तहत मिले सरकारी फंड के लाखों रुपए घोटाले का मामला उजागर हुआ है। सूचना अधिकार से मिली जानकारी के मुताबिक बंद भंगार अवस्था में पड़ी जीप के लिए लाखों रुपए डिजेल के लिए दिए गए हैं। इतना हीं नहीं बल्कि उस बंद जीप को चलाने के लिए ड्राईवर को भी लगातार वेतन दी जाती रही है। इस घोटाले के खुलासे के बाद पॉलिटेक्निक स्कूल के इंचार्ज प्रिसिपल के खिलाफ टिचरों ने बगावत के सूर उंचे करने शुरू कर दिए हैं। 

आरटीआई कार्यकर्ता फिरोज वोरा ने जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें पहले से ही पता था कि स्कूल के प्रिंसिपल जावेद अख्तर सरकारी फंड को गलत तरिके से हड़प रहे हैं। इस बात की जानकारी उन्होंने कई बार सूचना अधिकार के तहत ट्रस्टियों से मांगी तो नहीं दी गई। फिर सूचना आयुक्त ने प्रशासन को पांच हजार रूपए जुर्माना लगाकर जानकारी देने का आदेश दिया। जिसके बाद उक्त चौकानेवाला खुलासा हुआ। 

जानकारी में पता चला हैं कि प्रिंसिपल जावेद अख्तर ने कई वर्षों से भंगार अवस्था में गैरेज में बंद पड़ी स्कोर्पियो जीप को चलाने के लिए सरकार से लाखों रुपये का फंड वसूल रहे हैं। नियमित रूप से पेट्रोल और ड्राईवर के वेतन का पैसा लिया जा रहा हैं। इस गैरकानूनी ढंग से सरकार के साथ धोखाधड़ी कर लाखों का घोटाला करनेवाले प्रिसिंपल के खिलाफ फिरोज वोरा और कुछ शिक्षकों ने मिल कर अंजुमन-ए-इस्लाम के मैनेजमेंट से शिकायत की । मगर ट्रस्टियों ने महज खानापूर्ति के लिए कार्रवाई का आश्वासन देकर फाईल बंद कर दी और प्रिसिंपल ज्यों के त्यों अपने पद पर बने हुए हैं। प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई न होते देख अब स्कूल के शिक्षकों ने भी बगावत के तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। शिक्षकों ने मैंनेजमेंट को सूचना दी हैं कि बेईमानों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे।  इस मामले को लेकर दिनेश वोरा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी कर ली हैं। वहीं दूसरी ओर मैनेजमेंट की ओर से कोई भी मीडिया के साथ इस संदर्भ में बातचित को तैयार नहीं हुआ। जबकि जावेद अख्तर ने अदालत में इसके खिलाफ जवाब देने की बात कही हैं। 

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