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शुक्रवार, 10 अप्रैल 2015

महारष्ट्र विद्युत मंडल के निकम्मे कर्मचारियों की दादागिरी


ऋषि तिवारी/ संवाददाता
  नायगांव। नायगांव (जूचंद) सरकारी कर्मचारियों को लोगों की सेवा व बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए नियुक्त किया जाता है। जनता द्वारा दिए गए टैक्स से पगार और सरकारी सुविधा पाने वाले महाराष्ट्र विद्युत मंडल के अधिकारी और कर्मचारी भी जनता के सेवक ही हैं। इनका काम लोगों की समस्या का निवारण करना होता है, लेकिन नायगांव पूर्व स्थित जूचंद्र गांव स्थित महाराष्ट्र विद्युत मंडल कार्यालय में कार्यरत कर्मचारी इतने निकम्मे और बदतमीज हो चुके हैं कि उन्हें लोगों की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं। जूचंद्र गांव में विभिन्न स्थानों पर लोगों के लिए जानलेवा बने लटकते और झूलते तारों से कभी भी किसी मासूम नागरिक की जान जा सकती है लेकिन यह यहां कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों को दिखाई नहीं देता।
   आश्चर्य की बात तो ह है कि जब उन आंख और कान रहते हुए भी अंधे और बहरे की भूमिका निभा रहे कर्मचारी को शिकायत करने कोई नागरिक पहूंचता है तो भी उनकी भूमिका और व्यवहार नकारात्मक ही रहता है। ऐसा लगता है मानों ऐसे कर्मचारी सिर्फ कुर्सी तोड़ने के लिए और अवैध वसूली करने के साथ-साथ सरकार से हराम की पगार खाने के लिए ही नियुक्त हुए हैं। ऐसे में सवाल यह उ'ता है कि ऐसे निकम्मे और हराम की पगार लेनेवाले हरामखोर कर्मचारियों के अधिकारी क्या कर रहें हैं? क्या वे भी अंधे और बहरे हो चुके हैं। ऐसा स्थानीय नागरिकों का कहना है। मिली जानकारी के अनुसार जूचंद्र गांव स्थित हसोबा मंदिर के पास कई घरों के पास बिजली के तार खरतनाक स्थिति में लटके हुए हैं। इस बात की शिकायत करने जब एक स्थानीय रहिवासी विद्युत मंडल के कार्यालय में जाकर लटके तारों को  ठीक करने का आग्रह किया तो एक कर्मचारी ने बदतमीजी करते हुए शिकायतकत्र्ता से कहा कि जब मेरी मर्जी होगी तब  ठीक करूंगा। ज्यादा जल्दी है तो खुद ही  ठीक करवा लो। उस बेशर्म कर्मचारी अथवा अधिकारी ने अपना नाम भी बताने से साफ मना कर दिया।​

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