सोमवार, 16 अक्तूबर 2017

"मिशन पत्रकारिता" अखबार का हुआ लोकार्पण



   मुंबई। इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया में सकारात्मक पत्रकारिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मिशन पत्रकारिता संस्था द्वारा उपनगर मालाड पूर्व स्थित नर्मदा हॉल में मशहूर हस्तियों व प्रमुख अतिथियों की उपस्थिती में हिंदी साप्ताहिक "मिशन पत्रकारिता" समाचार पत्र का लोकार्पण पूरे हर्षो उल्लास के साथ संपन्न हुआ।
      प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित विधायक सुनील प्रभु ने इस कार्यक्रम में सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हम सकारात्मक पत्रकारिता का समर्थन करते है। हमारी ओर से जनहित में सभी प्रकार की सहायता "मिशन पत्रकारिता" को सैदेव उपलब्ध रहेगी। पत्रकारिता में निष्पक्ष आलोचना करना लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है।कामगार नेता व मुंबई मित्र/वृत्त मित्र के समूह संपादक अभिजीत राणे ने "मिशन पत्रकारिता"टीम को बधाई दी और पत्रकारों के अधिकारों ,उचित मानधन, मजीठिया वेज बोर्ड के फैसलों -सुझाओ को अमल में लाने व पत्रकारों की सुरक्षा के लिए सतत संघर्ष करने का मिशन पत्रकारिता की टीम से आवाहन किया।वहीं ब्रह्माकुमारी संस्था की सुश्री कुंती बेन व मीना बेन ने मेडिटेशन एवं आध्यात्म के जरिये सकारात्मकता को बरकरार रखने के तरीके बताकर श्रोताओं में ईश्वरीय ज्ञान की बौछार की ।जबकि वरिष्ठ पत्रकार एवं आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि वर्तमान समय मे समाचार पत्र का प्रकाशन करना आसान कार्य नही है, टीम में अनुभवी पत्रकारों के होने के चलते सहजता से "मिशन पत्रकारिता" अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेगी। दै.मुंबई हलचल के संपादक दिलशाद खान ने "मिशन पत्रकारिता" टीम के पत्रकारों व संस्था से जुड़े हुए लोगो की सराहना की तथा टीम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने की हामी भरी।इसके अलावा विधायिका विद्या ताई चव्हाण, पूर्व नगरसेवक अजित रावराणे, वैभव भरडकर, वसई-विरार शिवसेना नेता प्रेमनाथ (नवीन) दुबे आदि उपस्थित गणमान्य जनों ने अपने विचार प्रकट किए। सभी अतिथियों व गणमान्यजनों का गुलदस्ता व सन्मानचिन्ह देकर स्वागत सत्कार किया गया।
        कार्यक्रम का संचालन संस्था के अध्यक्ष शैलेष जायसवाल एवं मोटिवेशनल ट्रेनर श्रीमती दया मावले ने किया।महासचिव किशनदेव गुप्ता,समाजसेवी परेश चौधरी व युवा पत्रकार मुकेश गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया। आयोजक जितेंद्र शर्मा ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी मान्यवरों का आभार माना।
       कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए संस्था के उपाध्यक्ष आमिर अंसारी, कार्यकारी सदस्य नीलेश कोकमकर, विजय कांसे, गणेश म्याकम, महेंद्र चौधरी, उमेश राजुरिया,रवि शर्मा,सौरव सिंह, बृजेश सिंह, संगीता पाल, निशा चौबे, मीना चौधरी, ब्रिजेश पटेल, सतीश(डब्बू)पांडेय, मंजू पुष्कर, श्रीमती सायली करगुटकर, पूजा आदि पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं ने अथक परिश्रम किया।

गुरुवार, 26 जनवरी 2017

मिशन पत्रकारिता ने किया अनोखा ध्वजारोहण


संवाददाता / मुंबई
सकारात्मक पत्रकारों की संस्था ’मिशन पत्रकारिता’ ने हर बार की तरह इस बार भी प्रजासत्ताक दिवस पर अनोखे ढंग से ध्वजारोहण समारोह संपन्न किया। संस्था के मुख्य कार्यालय जोगेश्वरी पूर्व में एक बुजूर्ग महिला एवं सफाई कर्मचारी के हाथों ध्वजारोहण संपन्न हुआ। इस अलौकिक ध्वजारोहण समारोह में स्थानीय रहिवसियों ने सैंकड़ों की संख्या में उपस्थित रहकर संस्था पदाधिकारियों की हौसला अफजाही की। 

जोगेश्वरी पूर्व के नटवर नगर में स्थित ’मिशन पत्रकारिता’ के मुख्य कार्यालय में इस बार भी ध्वजारोहण समारोह में संस्था ने स्थानीय लोगों के साथ भावनात्मक रिश्ता कायम किया। संस्था द्वारा ७५ वर्षीय वरिष्ठ नागरिक महिला श्रीमति सुशिला तुकाराम नारकर तथा ६० वर्षीय सफाई कामगार वासुदेव हरी रेवाले के हाथों ध्वजारोहण करवा कर आम नागरिकों को समान अधिकार दिलाने की परंपरा को कायम किया गया। समारोह में न्यू़ज फोटो / वीडियोग्राफर अजय जायसवाल के आग्रह पर लगभग सभी लोगों ने देशभक्ति एवं भजन गा कर लोगों का मनोरंजन कर अविस्मरणीय घटना को कैमरे में कैद करवा कर माहौल रंगीन कर दिया। खासतौर पर दो बुजूर्ग लोगों द्वारा गाए पुराने गीतों ने सभी का मन प्रफुल्लित कर दिया। 

इस कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि के रूप में अमरावती में स्थित वाई.डी.लॉ कॉलेज के प्राचार्य एडवोकेट श्री राज बु. श्रीवास तथा अमरावती में मिशन पत्रकारिता द्वारा संचालित ’विचार क्रांति ध्यान साधना घर’ के प्रमुख व्यवस्थापक श्री कमलेश म. श्रीवास की मौजूदगी में ध्वजारोहण संपन्न हुआ । इस के अलावा कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष शैलेष जायसवाल तथा सीईओ गीता जायसवाल के साथ फिल्म प्रोड्यूसर दिनेश धीवार एवं ममता धीवार, रामजी भाई पटेल आदि गणमान्य लोगों ने शिरकत की । जबकि कार्यक्रम को सफल बनाने में कोषाध्यक्ष विलास जगताप, गोपाल शेटे, निलेश कोकमकर, सुनिल तिवारी तथा विनोद तंवर आदि ने भरपूर मेहनत की।

बुधवार, 21 दिसंबर 2016

संकल्प मन से करो सिद्ध हो जायेगा -बहन शिवानी


कांदिवली में ध्यान योग शिविरसंपन्न 

रिपोर्ट: श्यामसुंदर शर्मा
मुम्बई ,संकल्प मन से करो सिद्ध हो जायेगा। इस आशय का उदगार  राजयोगिनी ब्रह्मकुमारी शिवानी  बहन ने कांदिवली में रविवार को आयोजित ध्यान योग शिविर में व्यक्त किया। प्रजपिता ब्रह्मकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय की तरफ से रविवार को कांदिवली पूर्व के ठाकुर विलेज स्थित ठाकुर श्याम नारायण हाई स्कूल में किया गया। इस दौरान बहन शिवानी ने बताया कि मन्त्र का जाप मुख से नहीं,बल्कि मन से किया जाना चाहिए। उन्होंने संकल्प के महत्ता को प्रतिपादित करते हुए बताया कि संकल्प से ही सृष्टि बनती है। आप संकल्प करें कि हमारा हर सोच,व्यवहार प्यार और सम्मान से भरा हुआ है। आपने आपको ऊर्जावान बनाने के लिए संकल्प करें कि आपका शरीर हेल्दी है।  उन्होंने कहा कि स्वंय को अच्छा लगने वाला कार्य आवश्यक नहीं कि वह अन्य को भी अच्छा लगे। सेवा धन, अन्न एवं वस्त्र से भी होती है लेकिन सही अर्थों में सेवा वही है जिसमें सेवा देने वालों से लेने वालों को संख्या, शान्ति व प्यार मिले। सेवा करते समय जीवन में सिर्फ देने का लक्ष्य रखें। सेवा के बदले प्रतिफल में कुछ लेने की नहीं। सेंवा करते समय यदि लेने की भावना मन में रहेगी तो वह सेवा नहीं व्यापार होगा।कार्यक्रम में काफी संख्या में लोगों ने उपस्थित रहकर ध्यान योग शिविर का लाभ लिया। 

बुधवार, 30 नवंबर 2016

मिशन पत्रकारिता के मुंबई शहर प्रमुख पद पर जितेंद्र शर्मा की नियुक्ति


संवाददाता / मुंबई

         मिशन पत्रकारिता संस्था ने मुंबई में अपना विस्तार करते हुए मुंबई शहर प्रमुख के पद पर वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र शर्मा की नियुक्ति की। हालही में मिशन पत्रकारिता द्वारा मालाड पूर्व के कुरार विलेज, शिवाजी नगर में स्थित एवीएम एकेडमी स्कूल में आयोजित एक प्रेरणात्मक प्रशिक्षण कार्यशाला में उन्हें नियुक्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसी मौके पर भावुक हो उठे जितेंद्र शर्मा ने मौजूद सभी पत्रकारों के समक्ष इस जिम्मेदारी को बखूबी तरिके से निभाने का वादा कर वरिष्ठों द्वारा शुभकामनाएं ग्रहण की। 


       खासतौर पर जितेंद्र शर्मा के जन्मदिन पर आयोजित इस मोटिवेशनल कार्यक्रम में ट्रेनर निखिल अंबादासकर ने ’जीतने की आदत कैसे डाले?’ इस विषय पर मजबूत व्याख्यान दिया। वही हास्य कवि आदेश दुबे एवं अनिल त्रिपाठी (कड़क) ने अपनी रचनाओं के द्वारा लोगों का खूब मनोरंजन किया। कार्यक्रम के अंत में केक काट कर जितेंद्र शर्मा का जन्मदिन मनाया गया वहीं मिशन पत्रकारिता के अध्यक्ष शैलेष जायसवाल ने संस्था के सायबर सेल प्रमुख शैलेश जारिया के हाथों उन्हें मुंबई अध्यक्ष पद का नियुक्ति पत्र दिया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी पत्रकारों तथा समाजसेवी संगठनों के पदाधिकारियों ने उनकी नियुक्ति एवं जन्मदिन पर हार्दिक बधाइयां दी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथी के तौर पर मुंबई कांग्रेस सचिव संदिप सिंह, युवा कांग्रेस मुंबई सचिव इंद्रजीत सिंह उर्पâ पप्पू बसपा के शैलेष पवार, पत्रकार ओमप्रकाश मिश्रा, पत्रकार आनंद पांडेय, सत्यप्रकाश सोनी, राकेश चौबे, शिवप्रकाश सोनी, मिशन के उपाध्यक्ष प्राध्यापक अमीर अंसारी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी गीता जायसवाल मौजूद थे। जबकि कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षिका रानी गुप्ता, शिखा शर्मा, शकुंतला विश्वकर्मा, रवि शर्मा, प्रविण सिंह, ब्रिजेश सिंह, संतोष पाटील, पंकज राय, विक्रांत सिंह, सोहैल खान, सूरज श्रीवास्तव, संगम राय, प्रभात राय, निरज पांडेय तथा आशा त्रिपाठी ने भरपूर मेहनत की।  

शुक्रवार, 9 सितंबर 2016

सैंकडों लोगों ने मनाया विश्व ध्यान साधना दिवस


गुरूवार को विश्व ध्यान साधना दिवस (वर्ल्ड मेडिटेशन डे) के अवसर पर जोगेश्वरी पूर्व के अंबोली फाटक के समीप स्थित निकुंज स्कूल  हॉल में सैंकड़ों लोगों ने ध्यान साधना का प्रशिक्षण लेकर विश्व ध्यान साधना दिवस मनाया। इस अवसर पर कई वरिष्ठ पत्रकारों समेत, अभिनेता, राजनीति से जुडे मान्यवरों ने ध्यान साधना के जरिए खुद को ईश्वर से सीधे संपर्वâ करने का सार्थक प्रयास किया। 

    सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल ट्रेनर महेंद्र देवलेकर द्वारा इस शिबिर में लोगों को ध्यान साधना का प्रशिक्षण दिया गया। भारत को महाशक्तिशाली एवं आध्यात्मिक प्रगतीशील बनाने का लक्ष्य लेकर ’आकार नॉलेज वर्ल्ड’ एवं ’मिशन पत्रकारिता’ ने मिलकर गुरूवार ८ सितंबर को विश्व ध्यान साधना दिवस (वल्र्ड मेडिटेशन डे) मनाने के लिए विशेष निशुल्क ध्यान साधना शिबिर का आयोजन किया था। 
बता दें कि समूचे भारत वासियों को आध्यात्मि शक्ति के द्वारा उन्नती के रास्ते से अवगत कराने के लक्ष्य को लेकर मोटिवेशनल ट्रेनर महेंद्र देवलेकर देशभर में अब तक लाखों प्रेरणात्मक कार्यक्रमों का आयोजन कर चुके हैं । जिसके कारण कई मानसिक तनावों से गुजरते हुए लोगों के जीवन में चमत्कारिक बदलाव आया है। इसी विश्व ध्यान साधना दिवस के दिन देवलेकर के जन्मदिन के अवसर केक काट कर उनका जन्मदिन मनाया गया और सभी ने उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। 
      इस अवसर पर शिवसेना उत्तरभारतीय मंच के अध्यक्ष कैलाशनाथ पाठक, शाखाप्रमुख जयवंत लाड, श्रीमती मधुरा देवलेकर, मिशन पत्रकारिता के अध्यक्ष शैलेश जायसवाल, समाजसेवी विनोद काकरिया, इस्माइल अमिन, फ़िरोज़ मोहानी, श्रीमती गीता जायसवाल, विशाल गोस्वामी, सौरभ शर्मा आदि गणमान्य लोग उपस्थित थे।

सोमवार, 15 अगस्त 2016

लोगों का कचरा साफ करनेवाली महिला को मिला तिरंगा फहराने का सम्मान




संवाददाता / मुंबई
    देश के ६९ वे स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ’मिशन पत्रकारिता’ ने एक मिसाल कायम करते हुए १५ अगस्त को एक अनोखे तरीके से ध्वजारोहण समारोह मनाया। प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान को साथ देते हुए मिशन पत्रकारिता नामक संस्था ने मुंबई मनपा अंतर्गत गली-गली कूचे में लोगों के घरों का कचरा साफ करनेवाली ६१ वर्षीय बुजूर्ग महिला को सम्मान देने के लिए उसके हाथों देश का तिरंगा लहराया गया। तिरंगा लहराते हुए उस बुजुर्ग महिला की भीगी आखों को देख कर सभी का दिल भर आया। 
जोगेश्वरी पूर्व के नटवर नगर रोड़ पर स्थित मिशन पत्रकारिता के कार्यालय के परिसर में सुबह ९ बजे आयोजित ध्वजारोहण समारोह में संस्था ने किसी नेता, शिक्षक, पुलिस अधिकारी या किसी वीआईपी को न बुलाकर एक ऐसी बुजूर्ग महिला के हाथों तिरंगा लहराया जो लोगों के घरों से कूड़ा कचरा साफ करती है। जोगेश्वरी के पंप हाऊस में रहनेवाली ६१ वर्षीय श्रीमती गंगाबाई बापुराव सालवे पिछले कई सालों से इलाके का कचरा साफ करते हुए लोगों की सेवा कर रही है। ऐसे में तिरंगा लहराने का अवसर पाकर देश को सम्मान देते हुए उसके आंखों से आंसू छलकते नहीं थमे। भीगी आंखों से उस बुजूर्ग महिला ने मिशन के कार्यकर्ताओं को धन्यवाद देते हुए तहेदिल से आशीर्वाद दिया और कहा कि इतने सालों से सेवा करते हुए किसी ने मुझ जैसी दलित महिला को इस तरह का सम्मान कभी नहीं दिया और आज मिशन के इस सम्मान से मैं खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही हूं।
     मिशन पत्रकारिता के राष्ट्रीय सोशल विंग अध्यक्ष कैलाशनाथ पाठक के मुताबिक भारत देश के इस तिरंगे झंडे को शहिदों के लहूं से सींचा गया है। क्योंकि उनके बलिदान एवं प्राणों की आहूति से ही आज के दिन हर भारतवासियों के सीने पर या हाथ में, विद्यालयों और सरकारी दफ्तरों में तिरंगा लहराता हुआ दिख रहा है। इसलिए संस्था के प्रशिक्षक एवं आरटीआई कार्यकर्ता अजय शर्मा के सुझाव पर मिशन ने देश को मजबूती देनेवाले निम्न  वर्ग के लोगों को यह सम्मान देना उचित समझा। आगे भी संस्था ने देश में मौजूद निम्न वर्ग एवं दिव्यांग व्यक्तियों को प्रोत्साहन देने के लिए उन्हें आगे लाकर विभिन्न तरिके से सम्मान देने की योजना तय की है। 
    संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेष जायसवाल के नेतृत्व में हुए इस अनोखे ध्वजारोहण समारोह में संस्था के कोषाध्यक्ष विलास जगताप, आसीफ शेख, सीईओ गीता जायसवाल, जोगेश्वरी विभाग प्रमुख इस्माईल अमीन खान, विनोद तंवर, शफी अहमद, जगवीर भागवत, गोपाल शेटे, तथा स्थानीय रहिवासी संतोष रावल आदि लोगों समेत सैकडों लोगों ने उत्साह के साथ उपस्थित रहकर तिरंगे को सलामी दी। 

सोमवार, 11 जुलाई 2016

झूठ बोल कर किया इमोशनल, बच्चियों ने बेवजह फंसाया कमलेश को



संवाददाता / मुंबई
       मॉडल बनने के लिए और मुंबई में पढाई करने के लिए भदोही से भागकर आई दोनों जुड़वा बच्चियों ने डांस इंडिया डांस टीवी शो के कमलेश पटेल को इमोशनल कर उनसे मदद मांगी थी। दोनों बच्चियों ने कहा था कि उनके टीचर पिता शराब पीकर उन्हें व उनकी मां के साथ मारपीट करते हैं। इस तरह की सफाई देते हुए डांसर कमलेश पटेल ने मीडिया को कहा कि उनका उन जुड़वा बच्चियों से कोई संबंध नहीं है। केवल इंसानियत एवं मदद की भावना से ही उन्हें एक एनजीओ के पास सहायता के लिए भेजा था। 

       बता दें कि दोनों बच्चियों को संदिग्ध रूप से मुंबई में लाने की घटना को लेकर ओशिवरा पुलिस ने कमलेश पटेल को शक के दायरे में रखा था। क्योंकि बयान के दौरान बच्चियों ने कमलेश का नाम लिया था। जब महिला पुलिस निरिक्षक आरती गवारे ने दोनों से कमलेश का मोबाईल नंबर मांगा तो उन्होंने देने से इनकार किया और टॉयलेट जाने के बहाने मोबाईल का सिम निकालकर टॉयलेट में ही फेंक दिया। इस वजह से पुलिस ने कमलेश को शक के दायरे में लिया था। मगर कमलेश के पुछताछ के बाद सारी बातों का खुलासा हुआ। हालांकि पिछले दो दिनों से मीडिया में वायरल हुई दोनों बच्चियों की खबर से विचलित हो उठे कमलेश पटेल ने खुद होकर मुंबई पुलिस एवं मिशन पत्रकारिता से संपर्क किया और अपनी सफाई देते हुए कहा कि उनका उन बच्चियों से कोई भी संबंध नहीं है। वे लायंस क्लब ऑफ भदोही वरोणा द्वारा भदोही में स्थित ग्रीन व्यू पब्लिक स्कूल में आयोजित एक मोटिवेशनल कार्यक्रम को संबोधित करने गए थे। वहां उन बच्चियों ने उनके साथ सेल्फि ली थी। उसके बाद कहीं से उन्होंने कमलेश का मोबाईल नंबर निकालकर उनसे संपर्क किया और कहा कि उनके पिता उन्हें पढाना नहीं चाहते और हररोज मारपीट करते हैं। इसके बाद अंधेरी के हम्माद नामक एक शख्स की मदद से वे दोनों घर से झूठ बोल कर भागी और उस वक्त अमेरिका में मौजूद कमलेश से संपर्क कर उनसे मदद मांगी और कहा कि उनके माता-पिता से उनके बारे में न कहे अन्यथा वे खुदकुशी कर लेगी। इस वजह से भावुक होकर कमलेश ने उनकी सहयोगी किरण शर्मा से संपर्क कर उनकी मदद करने को कहा और किरण ने मामला मिशन पत्रकारिता को सौंपा जिसके बाद पुलिस की मदद से उन्हें परिजनों को सौंपा गया। वहीं कमलेश ने अपने लिखित बयान में कहा हैं कि आगे की तहकीकात के लिए मुंबई पुलिस एवं मिशन पत्रकारिता की हर संभव सहायता के लिए हाजिर रहूंगा। 

मॉडल बनने के लिए भदोही से भागी थी दो जुडवा बहने, तस्करों के हाथ लगते बची


मिशन पत्रकारिता ने पुलिस का सहारा ले किया परिजनों के हवाले।
शक के दायरे में डीआईडी के कमलेश पटेल

संवाददाता / मुंबई
    मायानगरी मुंबई की चकाचौंध में मॉडल बनने तथा पढाई करने के लिए २२ वर्षीय दो जुड़वा बहने उत्तर प्रदेश के भदोही शहर से घर छोड़कर भागी और मुंबई में तस्करों हाथों में फंसते-फंसते बाल-बाल बची। दोनों नादान बच्चियों को इस बात का पता भी न था कि उन्हें बहला- फुसलाकर तस्करी के लिए मुंबई बुलाया गया था। मामला ओशिवरा पुलिस थाने में ’मिशन पत्रकारिता’ एनजीओ के माध्यम से पहुचा जहा पुलिस ने पूरी छानबिन के बाद दोनों बच्चियों को उसके पिता एवं परिजनों के हवाले किया। दोनों बच्चि़यों की जिंदगी बचाने के इस कार्य को लेकर बच्चियों के परिवारवाले एवं पुलिस कमिश्नर ने ’मिशन पत्रकारिता’ की सराहना की। 
   
    मामला कुछ इस तरह है कि उत्तर प्रदेश में एक प्राईवेट स्कूल में टीचर के रूप में काम करनेवाले कमालउद्दीन अमीन ने अपने स्कूल में एक मोटिवेशनल प्रोग्राम में डांस इंडिया डांस शो के मशहूर डांसर कमलेश पटेल को विशेष अतिथी के रूप में आमंत्रित किया था। जहां उनकी दोनों जुड़वा बेटियां शायनी अमीन एवं सायबा अमीन से उनकी मुलाकात हुई। फिर मुलाकात के दौरान कमलेश पटेल ने दोनों बच्चियों को मुंबई में मॉडल बनाने का वादा किया। जिससे मुंबई जाने की वो दोनों जिद करने लगी। मगर उनके माता-पिता इस बात से राजी नहीं थे। आखिरकार मुंबई जाने की जिद ने उनके दिमाग में फितुर सवार कर दिया। उन्होंने फेसबुक से जुडे मित्र हम्माद नामक अंधेरी में आईडिया मोबाईल कंपनी में काम करनेवाले शख्स की मदद से मुंबई भागने का प्लान बनाया और सहेली के घर जाने के बहाने २५ जून को भदोही से मुंबई आने के लिए भाग निकली। जहां डांस इंडिया डांस शो के मशहूर डांसर कमलेश पटेल ने उन्हें सहारा देने के लिए किरण शर्मा नामक महिला के पास भेजा। 
जैसे ही किरण शर्मा के माध्यम से यह बात ’मिशन पत्रकारिता’ एनजीओ के पास पहुंची तो संस्था के अध्यक्ष शैलेष जायसवाल ने बच्चियों से उनके परिवार के बारे में पुछताछ की और जब उनके बयान पर शक हुआ तो उन्होंने झोन ९ के डीसीपी सत्यनारायण चौधरी को फोन पर इसकी सूचना दी और ओशिवरा पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरिक्षक सुनिल खानविलकर एवं महिला पुलिस निरिक्षक आरती गवारे ने मामले को हाथ में लेकर पुछताछ शुरू की। जिसके बाद लड़की के पिता को पुलिस थाने में बुलाकर बच्चियों को उनके हवाले किया। दोनों बच्चियों ने अपने बयान में कबूल किया कि कमलेश पटेल ने उन्हें मुंबई में मॉडल बनाने के लिए बुलाया। पुलिस को शक है कि इन दोनों बच्चियों को मुंबई में तस्करी के लिए लाया गया था और इसके पीछे किसी बड़े गिरोह का हाथ है। इस बात को लेकर शक के दायरे में कमलेश पटेल भी है कि जो बच्चियों के माता-पिता से परिचित होने के बावजूद इस बात की सूचना उन्होंने उनको परिजनों अथवा स्वूâल प्रशासन को नहीं दी थी। महिला पुलिस निरिक्षक आरती गवारे ने मीडिया को बयान दिया कि इस घटना के बाद अभी और भी तहकीकात बाकी है। पुलिस अपना काम कर रही है और बहुत जल्द ही बड़े गिरोह का पर्दाफाश करेगी। इस दौरान पुलिस की टिम के साथ जुड़ कर काम करनेवाले ’मिशन पत्रकारिता’ के कार्यकर्ताओं में सीईओ- गीता जायसवाल, वरिष्ठ पत्रकार अजय शर्मा, एवं किरण शर्मा आदि ने मामले को सुलझाने के लिए कड़ी मेहनत की। वहीं परिजनों ने ओशिवरा पुलिस एवं संस्था कार्यकर्ताओं का आभार माना। 

शुक्रवार, 1 अप्रैल 2016

राज्यमंत्री रवीन्द्र वायकर के कर कमलों द्वारा सम्पन्न हुआ मिशन पत्रकारिता के वित्तीय वार्षिक कैलेंडर का लोकार्पण


       देश भर मे पत्रकारिता जगत मे सकारात्मक क्रांति का लक्ष लिए हुए मिशन पत्रकारिता नामक संस्था ने अपने वित्तीय वार्षिक कैलेन्डर का प्रकाशन किया। जिसका लोकार्पण महाराष्ट्र के गृहनिर्माण एवं व उच्च तंत्र शिक्षा राज्यमंत्री श्री रवींद्र वायकर के करकमलों द्वारा मंत्रालय के समीप स्थित उनके क-४ बंगले पर संम्पन्न हुआ। इस वित्तीय वार्षिक वैâलेंडर की विशेषता यह है कि इसमें पत्रकारिता से संबधित सभी जानकारियां व आवश्यक फोन नंबर दिए गए हैं। जो पत्रकारिता के साथ साथ आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।  इस मौके पर विशेष अतिथि के रूप में शिवसेना नगरसेवक बाला नर व जितेन्द्र वलवी, शिवसेना शाखा प्रमुख अमर मालवणकर,  सुभाष  माजरेकर समेत कई मान्यवर उपस्थित थे।
       इसके अलावा समारोह में मिशन पत्रकारिता के राष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेश जायसवाल, महासचिव  किसनदेव गुप्ता, कोषाध्यक्ष विलास जगताप, संरक्षक श्री प्रताप काकरिया,उपाध्याय सुरजीत सिंह व आमीर अंन्सारी,  महाराष्ट्र प्रदेश प्रभारी  श्यामसुन्दर शर्मा, शोशल विंग के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष आसीफ शेख,  एडवोकेट अजय वजयकर, उत्तर पश्चिम मुबंई जिला अध्यक्ष राकेश कश्यप,  पालघर जिला अध्यक्ष मिल्टन सौदिया,  सोशल विंग के पालघर जिला अध्यक्ष संतोष राय,  जिला महासचिव किशोर परिहार, कु. आरवा नलवाला,  किरण शर्मा, शैलेश जारीया, सोशल विंग महिला विभाग की वसई तालुका अध्यक्षा श्रीमती सरीता चतुर्वेदी,  तालुका उपाध्यक्षा श्रीमती सोना लखानी तथा राष्ट्रीय कमेटी के कार्यालय प्रमुख आनंद मिश्रा उपस्थित थे। 

गुरुवार, 11 फ़रवरी 2016

साईबर क्राईम को रोकने के लिए एक हजार मुफ्त सेमिनार


मुंबई। दुनियाभर में बढती सोशल वेबसाईटों की लोकप्रियता चरम पर होने के साथ साथ उसके जरिए बढते साईबर क्राईम भी चिंता का विषय बनते जा रहे हैं । वहीं मोबाईल तथा कम्प्यूटर हैकिंग के जरिए लोगों को ब्लैकमेलिंग तथा परेशान करने की वारदातों में इ़जाफा होना भी साईबर पुलिस का सिरदर्द बना हुआ है। ऐसे में इस साईबर क्राईम से बचने के लिए लोगों को जागरूक करने हेतु ’साईबर क्राईम रोक’ नामक संस्था ने देशभर में एक हजार से भी अधिक मुफ्त सेमिनार रखने का अभियान छेड़ा है। 
     मंगलवार को मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित एक पत्रकार परिषद में जानकारी देते हुए संस्था के प्रमुख शैलेश जारिया ने बताया कि वे अपने इस अभियान में किसी से किसी भी तरह का अनुदान न लेते हुए सेवाभाव से जनजागृती अभियान चला रहे हैं। हालांकि जिस तरह साईबर पुलिस अपनी जिम्मेदारी बखुबी नहीं निभा रही है, उसी को देखते हुए उनका मकसद हैं कि देश में अधिक से अधिक लोग एथिकल हैकिंग के बारे में जानकर साईबर क्राईम को रोक लगा सके। उन्होंने लोगों को सलाह देते हुए कहा कि लोगों को चाहिए कि वे वाट्सएप के स्टेटस में अपनी कोई भी जानकारी न दे या अपनी सुंदर फोटो न लगाए। वहीं किसी भी सोशल मीडिया में भेजे गए भगवान या अल्लाह के मैसेज बिना सोचे समझे फॉरवर्ड न करे। ऐसा करना घातक हो सकता है और आप हैविंâग के शिकार हो सकते है। हालांकि लोगों को इंटरनेट से व्यस्त रखने के लिए कुछ सोशल साईटों का यह षडयंत्र हो सकता है। 
      पत्रकार परिषद में उनके साथ मौजूद एथिकल हैकर विनित जैन ने दर्शकों में से एक के मोबाईल को हैक कर प्रत्यक्ष रूप से बताया कि किस तरह आप भी मोबाईल हैकिंग के शिकार हो सकते है। बता दे कि कई साईबर क्राईम के शिकार आखिरकार मजबूर हो कर खुदकुशी का रास्ता अपना चुके है। इसलिए ’साईबर क्राईम रोक’ ने लोगों की मदद के लिए हेल्पलाईन नं ०९८३३२८३०३० की शुरूआत की है। जिसपर साईबर क्राईम से बचने के लिए तरकीबे बताई जा सकेगी। 

सोमवार, 9 नवंबर 2015

’मिशन पत्रकारिता’ का दीपावली स्नेह सम्मेलन संपन्न


(संवाददाता / मुंबई )
मुंबई । ’मिशन पत्रकारिता’ की ओर से दीपावली स्नेह सम्मेलन एवं सकारात्मक पत्रकारिता मार्गदर्शन शिबिर संपन्न हुआ। जिसमें सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल ट्रेनर महेंद्र देवलेकर ने सैंकड़ों पत्रकारों को मेडिटेशन के माध्यम से मार्गदर्शन कर समाज के हित में क्रांतिकारी पत्रकारिता करने के लिए प्रेरित किया। अंधेरी पश्चिम के वर्सोवा में स्थित दलजीत हॉल में संपन्न हुए इस कार्यक्रम में मुंबई के सैंकड़ों पत्रकार व गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। 
पत्रकारिता की दुनिया में पहली बार आयोजित इस अभूतपूर्व कार्यक्रम की शुरूआत एस कुमार ग्रुप ऑफ वंâपनी के मालिक श्री आलोक कास्लीवाल एवं श्री विनोद कांकरिया ने दीप प्रज्वलित करके किया। इसके बाद एक से बढकर एक चमत्कारिक प्रयोग से श्री महेंद्र देवलेकर ने पत्रकारों को मानसिक विकास की कला सिखाई। ’मिशन पत्रकारिता’ के अध्यक्ष शैलेष जायसवाल के मुताबिक संस्था का उद्देश ही मीडिया जगत एवं समाचारों में पैâली नकारात्मता को सकारात्मकता में बदलना है। इसके लिए संस्था की ओर से हर रविवार साप्ताहिक कार्यशाला एवं वार्षिक समारोह के जरिए पत्रकारों को ध्यान साधना के माध्यम से कला लेखन का प्रशिक्षण दिया जाता है। ताकि उनके द्वारा सकारात्मक पत्रकारिता से देश में एक बार फिर नई क्रांति का उदय हो सके। 
कार्यक्रम में मुख्य अतिथी के रूप में श्री उद्योगपति आलोक कास्लीवाल, समाजसेविका ममता कदम, सुंदर गुप्ता, चार्टर्ड अकाऊंटंट श्री प्रताप कांकरिया व श्री विनोंद कांकरिया उपस्थित थे। इसके अलावा मुुंबई के कई वरिष्ठ पत्रकारों ने भी दिनभर के कार्यक्रम का लुफ्त उठाया। कार्यक्रम के लिए मुख्य संरक्षक के रूप में सुप्रसिद्ध एडवोकेट नीलेश ओझा, समाजसेवक आशिक मर्चंट, भाजपा वार्ड अध्यक्ष श्री ज्ञानेश्वर व शिवसेना उत्तरभारतीय मंच के अध्यक्ष श्री वैâलाशनाथ पाठक ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया। जबकि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए संस्था के महासचिव विजय पवार, कोषाध्यक्ष विलास जगताप, पालघर जिलाध्यक्ष किसनदेव गुप्ता, फिरोज मोहानी, गोपाल रामदास शेटे, हिना शेख, राहुल ओंकार, अमीर अंसारी तथा अरूण कमल ने भरपूर मेहनत की।

बुधवार, 4 नवंबर 2015

पत्रकारों के लिए मार्गदर्शन शिबिर एवं दीपावली स्नेह सम्मेलन ७ नवंबर को



   मुंबई । पिछले २ वर्षो से लगातार सकारात्मकखबरों की पहल करते हुए मिशन पत्रकारिता संगठन ने कई पत्रकारों को पॉजिटिव पत्रकारिता के लिए साप्ताहिक कार्यशाला के माध्यम से मार्गदर्शन करती आई है। इसी के चलते इस दीपावली के अवसर पर सभी पत्रकारों के लिए संस्था ने विशेष दिपावली स्नेह सम्मेलन एवं सकारात्मक पत्रकारिता मार्गदर्शन शिबिर का आयोजन शनिवार ७ नवंबर को किया है। 
मिशन पत्रकारिता के अध्यक्ष शैलेष जायसवाल ने बताया कि ७ नवंबर को सुबह ९ बजे से शाम ६ बजे तक दिनभर चलनेवाले इस शिबिर में सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल ट्रेनर श्री महेंद्र देवलेकर मेडिटेशन के माध्यम से पत्रकारों का मार्गदर्शन करेंगे। कार्यक्रम में सुबह अल्पाहार से लेकर भोजन की व्यवस्था रखी गई है। अंधेरी पश्चिम में सात बंगला गार्डन के वर्सोवा श्वेतांबर जैन मंदिर के समीप स्थित दलजीत जिमको हॉल में आयोजित इस पत्रकार सम्मेलन में शहर के कई सम्मानित संपादक एवं पत्रकार उपस्थित रहेंगे। ऐसे में संगठन ने मुंबई के सभी पत्रकारों से निवेदन किया हैं कि वे इस सम्मेलन में उपस्थित रहकर खुद का एवं समाज का आत्मविकास करें। कार्यक्रम में सम्मीलित होने के लिए विशेष प्रवेश पास की व्यवस्था की गई है। अधिक जानकारी के लिए संगठन के महासचिव विजय पवार से ०९८९२१९४९०१ संपर्क कर सकते हैं।

रविवार, 25 अक्तूबर 2015

देश में सही न्यायव्यवस्था के लिए ’पारदर्शी एवं न्याय बिल २०१५’ का प्रस्ताव




कु. हीना शेख / मुंबई )

एक फर्जी बलात्कार के आरोप में सात साल की सजा जेल में पूरी करने के तीन महीने बाद मुंबई हाईकोर्ट ने जहां गोपाल शेट्टे को निर्दोष साबित कर बाइज्जत बरी कर दिया वहीं गोपाल की तरह कोई अन्य व्यक्ति कानून के अन्याय का शिकार न बने इसको लेकर ऑर्गनाइजेशन ऑफ़ जस्टिस फॉर ह्यूमैनिटी अवेर्नेस (ओझा ) नामक एनजीओ अब पारदर्शी एवं शीघ्र न्याय बिल २०१५ लाने की कवायद में जुट गई है। ओझा के संस्थापक एंड नीलेश ओझा का आरोप है कि कानून के रखवाले ही कानून के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे में अधिकांश मामलों में दोषी व्यक्तियों को जहां कानूनी संरक्षण प्राप्त होता हैं, वहीं कितने ही निर्दोशों का बेवजह कानूनी शिवंâजे में पंâसने के कारण उनका जीवन बरबाद हो जाता है, ऐसा आगे किसी अन्य के साथ न हो,इसके लिए ओझा एनजीओ  पारदर्शी एवं शीघ्र न्याय बिल का प्रस्ताव सरकार के संज्ञान में लाकर लोकसभा में पेश कराना चाहती है ताकि लोगों को सही न्याय मिलने में हर संभव मदद मिल सके। 
बता दें कि गोपाल शेटे पर बलात्कार का आरोप लगा था और उसे सात साल की सजा भी भुगतनी पड़ी। इस बदनुमा आरोप के बाद अपना सब कुछ गंवा चुके गोपाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद अपने पुनर्वसन के लिए हाईकोर्ट में सरकार से २०० करोड़ रूपये मानहानि का दावा किया है। गोपाल की ओर से याचिका दायर करनेवाले एडवोकेट निलेश ओझा ने दोषी कुर्ला रेल्वे पुलिस एवं सत्र न्यायाधीश के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की मांग की है। 
हाईकोर्ट ने माना कि नाम की गलती की वजह से आरोपी गोपी की जगह गोपाल शेटे को धोखे से बली का बकरा बनाया गया। गौरतलब है कि अपनी गरीब परिस्थिति के चलते गोपाल खुद को निर्दोष साबित करने के लिए कोई वकील नियुक्त नहीं कर सका।  इस वजह से सत्र न्यायालय ने गोपाल को ७ साल की सजा सुना दी।  मगर फिर  भी जेल में हिम्मत न हार कर गोपाल ने जेल के अंदर ही अपनी पढाई करते हुए खुद को निर्दोष साबित करने के लिए २०१० में हाईकोर्ट में याचिका दायर की और खुद ही अपनी वकालत की।  जेल के अंदर से ही लगभग ४० से भी ज्यादा सूचना अधिकारों (आरटीआई ) के तहत जानकारिया मंगाकर मिले मजबूत सबूतों के आधार पर गोपाल ने खुद को तो निर्दोष साबित कर ही दिया। मगर हाईकोर्ट की जब सुनवाई हुई तब तक गोपाल की सजा पूरी होकर तीन महीने से भी ज्यादा गुजर चुके थे।  
एडवोकेट निलेश ओझा के मुताबिक देश के कुछ भ्रष्ट न्यायाधीश भी कानून और न्यायपालिका को खोखला कर रहे हैं। अक्सर दंबगों के साथ मिलकर निर्दोषों को कानूनी शिवंâजे में पंâसाया जा रहा है। ऐसे में मजबूर व्यक्ति केवल न्यायाधीशों की तानाशाही का शिकार होकर रह जाते हैं। एंड. नीलेश ओझा का कहना है कि पारदर्शी एवं शीघ्र न्याय बिल २०१५ कानून के पास होने पर सभी अदालतों में सीसीटीवी वैâमेरे लगने से न्यायव्यवस्था में पारदर्शिता आयेगी। इस कानून की वजह से कोई भी तानाशाह न्यायाधीश अपनी मनमानी नहीं कर पाएगा। संविधान में सबके लिए समान न्याय होगा। इस कानून के लागू होने पर दोषी न्यायाधीशों पर कार्रवाई के लिए स्पेशल अदालतें व विशेष पुलिस विभाग होंगे। साथ ही दोषी पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए विशेष पुलिस थाने रहेंगे। इस वजह से अधिकारी भी गलत काम करने से कतरायेंगे। एडवोकेट ओझा ने बताया कि झूठे सबूतों के आधार पर किसी निर्दोष को सजा देने के आरोप में भादस की धारा २११, २२० तथा १९४ के तहत पुलिस और न्यायाधीश को कम से कम ७ साल की सजा होनी चाहिए।  ओझा के मुताबिक उनके एनजीओ के माध्यम से वे ऐसे ही असहाय कानून पीड़ित लोगों की मदद करते हैं तथा लोगों को कानूनी जानकारियां देकर उन्हें खुद अपनी वकालत करने के लिए प्रेरित किया जाता है।  
उक्त बिल में दिए प्रस्ताव के मुताबिक हर पुलिस थाने में शिकायतकर्ता का वीडियो रिकॉर्डिंग होना जरूरी है। हर सरकारी अधिकारी, न्यायाधीश, नेता, मंत्री एवं दबंगों के खिलाफ किसी की भी शिकायत हर पुलिस थाने में बिना किसी पूर्व अनुमति के ली जा सकेगी। प्रलंबित मामलों को जल्दी निपटाने के लिए न्यायाधीशों की संख्या बढाई जाए तथा न्यायालयों में हर मामलों का निपटारा महज छह माह से एक साल के भीतर होना जरूरी होगा। वहीं एक साल के ऊपर चलनेवाले मामलों का पर्याप्त कारण न्यायाधीश को देना होगा अन्यथा दोषी न्यायाधीश पर कार्रवाई होगी।

मंगलवार, 29 सितंबर 2015

बेगुनाह को मिली ७ साल की सजा, कुर्ला पुलिस और सत्र न्यायाधीश पर कार्रवाई की मांग



गोपाल के लिए एडवोकेट निलेश ओझा ने किया २०० करोड़ मानहानि का दावा

(विजय पवार / मुंबई )
एक फर्जी बलात्कार के आरोप में सात साल की सजा जेल में पूरी करने के तीन महीने बाद मुंबई हाईकोर्ट ने निर्दोष गोपाल शेटे को बाईज्जत बरी किया। मगर इस बदनुमा आरोप के बाद अपना सब कुछ गंवा चुके गोपाल ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद अपने पुनर्वसन के लिए सरकार से २०० करोड़ के लिए मानहानि का दावा किया है।  गोपाल की ओर से याचिका दायर करनेवाले एडवोकेट निलेश ओझा ने दोषी कुर्ला रेल्वे पुलिस एवं सत्र न्यायाधीश के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की मांग भी की करते हुए आज मंगलवार २९ सितम्बर को हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे।  

हाईकोर्ट ने माना कि नाम की गलती की वजह से आरोपी गोपी की जगह गोपाल शेटे को धोखे से बलि का बकरा बनाया गया।  गौरतलब है कि अपनी गरीब परिस्थिति के चलते गोपाल खुद को निर्दोष साबित करने के लिए कोई वकील नियुक्त नहीं कर सका।  इस वजह से सत्र न्यायालय ने गोपाल को ७ साल की सजा सुना दी।  मगर फिर  भी जेल में हिम्मत न हार कर गोपाल ने जेल के अंदर ही अपनी पढाई करते हुए खुद को निर्दोष साबित करने के लिए २०१० में हाईकोर्ट में याचिका दायर की और खुद ही अपनी वकालत की।  जेल के अंदर से ही लगभग ४० से भी ज्यादा सुचना अधिकारों (आरटीआई ) के तहत जानकारिया मंगाकर मिले मजबूत सबूतों के आधार पर गोपाल ने खुद को तो निर्दोष साबित कर ही दिया।  मगर हाईकोर्ट की जब सुनवाई हुई तब तक गोपाल की सजा पूरी होकर तीन महीने से भी ज्यादा गुजर चुके थे।  

मंगलवार को आयोजित पत्रकार परिषद में पीड़ित गोपाल शेटे ने बताया कि ७ साल जेल में बिताने के बाद गोपाल की पूरी दुनिया ही बदल चुकी थी।  उसकी पत्नी ने गोपाल की दोनों लड़कियों को अनाथ आश्रम में दाल कर दूसरी शादी कर ली।  पिता का सदमे से देहांत हो गया।  पिता की चिता को आग लगाने के लिए भी गोपाल को पेरोल या छुट्टी नहीं मिली।  माँ की हालत पागलों जैसी हो गई।  जमीन जायदाद सबकुछ खत्म हो चूका।  ऐसे में अकेले और बर्बाद हो चुके गोपाल ने अपने पुनर्वसन के लिए आजाद मैंदान में ही बैठ कर आमरण अनशन शुरू कर दिया।  इस दौरान किसी भी राजनेता या अधिकारी ने गोपाल की मदद के लिए हाथ नहीं बढ़ाया।  तब ऑर्गनाइजेशन ऑफ़ जस्टिस फॉर ह्यूमैनिटी अवेर्नेस (ओझा ) नामक एनजीओ के संस्थापक एडवोकेट निलेश ओझा ने गोपाल की मानहानि के लिए निशुल्क याचिका दायर करने का आश्वासन दिया।  

इसी के चलते एडवोकेट निलेश ओझा ने सरकार से दोषी पुलिस और सत्र न्यायाधीश के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए गोपाल के पुनर्वसन के लिए २०० करोड़ रुपये के मानहानि की याचिका दायर की है। पत्रकारों को संबोधित करते हुए एडवोकेट ओझा ने बताया कि झूठे सबूतों के आधार पर किसी निर्दोष को सजा देने के आरोप में भादस की धारा २११, २२० तथा १९४ के तहत पुलिस और न्यायाधीश को कम से कम ७ साल की सजा होनी चाहिए।  ओझा के मुताबिक उनके एनजीओ के माध्यम से वे ऐसे ही असहाय कानून पीड़ित लोगों की मदद करते है तथा लोगों को कानूनी जानकारियां देकर उन्हें खुद अपनी वकालत करने के लिए प्रेरित किया जाता है।  

गौरतलब है कि आए दिन बलात्कार के बढ़ते फर्जी मामलों से देश की न्यायव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।  महिला आयोग ने खुद माना है की बलात्कार के बढ़ते फर्जी मामलो से निर्दोष पुरुषों को सताया जा रहा हैं और उन्हें ब्लैकमेल किया जा रहा है।  अब देखना यह है की निलेश ओझा की याचिका के बाद न्यायपालिका अब कौनसा नया क़ानून लागू कर पायेगी।

शनिवार, 12 सितंबर 2015

शिवसेना को समर्थन के बाद उत्तरभारतीयों मिला ठेंगा


(अजय शर्मा )
 मुंबई में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बाद उत्तरभारतीय नेता खुद को ठगा सा महसूस करने लगे हैं। चुनाव के दौरान कई राजनैतिक पार्टियों ने उत्तरभारतीय नेताओं को जीत हासिल होने पर महत्वपूर्ण पद देने का वादा किया था। खासतौर पर शिवसेना और भाजपा में महत्वपूर्ण पद पाने के लालसा में नेताओं ने उन्हें भारी जीत तो दिला दी, मगर अभी तक पद के नाम पर उन्हें केवल लॉलीपॉप ही थमा दिया गया। इस वजह से शिवसेना व भाजपा के कई उत्तरभारतीय नेता नाराज दिखाई दे रहे हैं। 
     हालांकि उनकी नाराजगी भी जायज है । गौरतलब है कि हाल के विधानसभा चुनाव में शिवसेना को समर्थन देना उत्तरभारतीय संघ में भी घमासान का कारण बन गया है। संघ मुंबई में रहनेवाले करीब ३५ लाख उत्तरभारतियों की प्रतिनिधि संस्था मानी जाती है। वहीं दूसरी ओर शिवसेना उत्तरभारतीय मंच के अध्यक्ष कैलाशनाथ पाठक ने सांसद गजानन किर्तीकर एवं महाराष्ट्र के गृह निर्माण राज्यमंत्री रविंद्र वायकर समेत अंधेरी के रमेश लटके के पाले में उत्तर भारतीयो के वोट डालने में एड़ी चोटी का जोर लगाया था। हालांकि इन दोनों के जीत में उत्तरभारतीय वोट निर्णायक साबित हुए। शिवसेना में उत्तरभारतीयों का मंच बनने और  कैलाशनाथ पाठक के हाथों कमान देने के बाद उत्तर भारतीय लोगों का शिवसेना ओर देखने का नजरिया बदलने लगा था। साथ ही पाठक ने शिवसेना के लिए विशाल उत्तर भारतियों को समर्थन भी जुटा लिया  था। मगर शिवसेना में मराठीवाद के चलते  कैलाशनाथ  पाठक को कोई खास तवज्जो नहीं मिल पा रही है।  इस वजह से पाठक के समर्थक भी पार्टी से नाराज है। 
      दूसरी ओर देखा जाए तो पिछले विधानसभा चुनाव में उत्तरभारतीय संघ के अध्यक्ष आर.एन.सिंह अपने पुत्र संतोष सिंह को शिवसेना से एवं भतीजे अमरजीत सिंह को भाजपा से टिकट दिलवाने में सफल रहे थे। ये दोनों उम्मीदवारियां मुंबई के दो नामचीन उत्तरभारतीय नेताओं क्रमश: मोहममद आरिफ नसीम खान एवं कृपाशंकर सिंह के विरुद्ध हासिल की गई थीं। आर.एन.सिंह के परिवार के इन दोनों सदस्यों को चुनाव में मुंह की खानी पड़ी, लेकिन उत्तरभारतीय मतों में बंटवारे के कारण पूर्व मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह को हार का मुंह देखना पड़ा। चुनाव के दौरान प्रमुख उत्तरभारतीय नेताओं की ही जड़ खोदना अब उत्तरभारतीय संघ के अध्यक्ष आर.एन.सिंह को भारी पड़ रहा है।
      चुनाव के दौरान आर.एन.सिंह ने उत्तरभारतीय संघ द्वारा शिवसेना को समर्थन देने की घोषणा कर दी थी। अब संघ के कार्याध्यक्ष शारदा प्रसाद सिंह सहित कार्यकारिणी के दो दर्जन से ज्यादा सदस्यों ने संघ के अध्यक्ष सिंह को पत्र लिखकर सवाल उठाया है कि विधानसभा चुनाव के दौरान शिवसेना को समर्थन देने की अपील किस आधार पर जारी की गई थी। वहीं शिवसेना के मुखपत्र ’दोपहर का सामना’ के कार्यकारी संपादक प्रेम शुक्ल ने हर शिवसेना नेताओं का मंच पर प्रचार प्रसार जमकर किया था। मगर उन्हें भी शिवसेना ने केवल अखबार निकालने तक ही सीमित रखा और आगे बढने का मौका नहीं दिया।  इस कारण उनकी नाराजगी भी जायज है।  हालांकि ऐसा माना जा रहा था कि चुनाव के बाद प्रेम शुक्ल को राज्यसभा की सीट दी जाएगी। मगर ऐसा न होने से उत्तरभारतीय असंतोष हो गए। 
       मुंबई में उत्तरभारतियों की सबसे बड़ी शिक्षण संस्था झुनझुनवाला काले के ट्रस्टी डॉ.राजेंद्र सिंह सवाल उठाते हैं कि जिस शिवसेना की बुनियाद ही उत्तरभारतियों के विरोध पर टिकी रही हो, चुनाव में उसे उत्तरभारतियों की प्रतिनिधि संस्था का समर्थन क्यों दिया जाना चाहिए। मुंबई के उत्तरभारतियों को यह चिंता भी सता रही है कि संघ के अध्यक्ष के शिवसेना में शामिल होने के बाद कहीं संघ पर शिवसेना का झंडा न फहराने लग जाए। जबकि संघ की कार्यकारिणी में सभी दलों के लोग शामिल रहे हैं।

सोमवार, 11 मई 2015

आज का इंसान भौतिक हो गया - नाज़नीन


अजय शर्मा / मुंबई
 नेपाल में आया भूकम्प वो खुदा का कहर नहीं है इंसानों द्वारा किये गए पापों ने ललकार दिया उसके कहर को जिसमें मिट गए कई घरों  के चिराग कई परिवार पांच लाख जानवरों के साथ किया गया अत्याचार कहीं न कहीं खुद को भी दहला कर रख दिया इंसानों ने धर्म शान्ति, अखंडता और नेपाल पर अपनी एक सोच बताते हुए बोली की ऊपर वाले ने। इंसान को अच्छे कर्म करने और दुनिया में प्यार से रहने के लिए भेजा है। लेकिन इंसान क्या कर है। मार, काट, अशांति, नफरत इसका जिम्मेदार खुद है। पांच लाख जानवरों की मौत का जिम्मेदार कौन ? नेपाल को देख कर सब को सीख लेनी चाहिए। की ऊपर वाले ने पृथ्वी बनाई है। इंसान को छेड़ छाड़ करने का कोई हक्क नहीं है। ये दुनिया में इंसान सिर्फ एक किरायेदार है मालिक वो ऊपर वाला। लेकिन इंसान ही मालिक बन बैठा है। आज का इंसान भौतिक हो गया है। कई वर्ष पीछे चला गया है। नेपाल एक हिन्दू देश है दिल से मेरी प्रार्थना नेपाल वासियों के साथ है। कई वर्ष पीछे चला गया है।मुंबई की सत्र न्यायालय में आज सलमान के हिट एंड रन मामले में ५ वर्ष की सज़ा का एलान किया  हैं। नाज़ ने कहा की युवा पीढ़ी के आईकॉन सलमान भले जरूर हैं लेकिन किसी व्यक्ति के हत्या के आरोपी भी हैं और दूसरा उन पर चिंकारा नामक हिरन का भी मामला है जानवर और इंसान दोनों के दोषी हैं सलमान एक अच्छे इंसान हैं। लेकिन न्यायालय सबके लिए और  कानून भी सबके लिए एक है। 

मैत्री प्रतिष्ठान’ का वर्धापन दिवस


    मुंबई। भांडुप में सामाजिक संस्था ’मैत्री प्रतिष्ठान’ के वर्धापन दिवस के अवसर पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिसमें उक्त क्षेत्र के बूजुर्ग नागरिकों को ’सिनियर सिटिजन कार्ड’ वितरित किए गए। संस्था के अध्यक्ष एवं शिवसेना शाखा प्रमुख संतोष माने ने यह घोषणा की कि उक्त संस्था के माध्यम से झुग्गी झोपड़ियों में बसे लोगों के स्वास्थ्य व शिक्षा के विकास के लिए काम कर आनेवाले सालभर में भांडुप के नागरिकों की जीवनशैली बदल कर रख देंगे। 
     वर्धापन दिवस के अवसर पर संस्था के पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देने के लिए भांडुप के विधायक अशोक पाटिल, समाजसेवक व पराग विद्यालय के संचालक बालकृष्ण बनेशेठ, नगरसेवक सुरेश कोपरकर, पत्रकार किशोर गावडे, शिवसेना उपविभागप्रमुख सतिश अधिकारी समेत कई मान्यवर उपस्थित थे।  जबकि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए संस्था के कार्याध्यक्ष नरेश म्हस्कर, उपाध्यक्ष दिलिप सालुुंंखे, महासचिव अजिंक्य भोसले, पराग  बने, प्रशांत मोरे, प्रशांत कदम, रविंद्र धनावडे, मृणाल घोरपडे, संजय जाधब, संतोष ब्रिद, सुनिल बोटे, गणेश अमिन, गणेश जाधव, डॉ.विशाल यादव, विनय झाजम समेत कई कार्यकर्ताओं ंने जमकर मेहनत की। 

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2015

महारष्ट्र विद्युत मंडल के निकम्मे कर्मचारियों की दादागिरी


ऋषि तिवारी/ संवाददाता
  नायगांव। नायगांव (जूचंद) सरकारी कर्मचारियों को लोगों की सेवा व बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए नियुक्त किया जाता है। जनता द्वारा दिए गए टैक्स से पगार और सरकारी सुविधा पाने वाले महाराष्ट्र विद्युत मंडल के अधिकारी और कर्मचारी भी जनता के सेवक ही हैं। इनका काम लोगों की समस्या का निवारण करना होता है, लेकिन नायगांव पूर्व स्थित जूचंद्र गांव स्थित महाराष्ट्र विद्युत मंडल कार्यालय में कार्यरत कर्मचारी इतने निकम्मे और बदतमीज हो चुके हैं कि उन्हें लोगों की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं। जूचंद्र गांव में विभिन्न स्थानों पर लोगों के लिए जानलेवा बने लटकते और झूलते तारों से कभी भी किसी मासूम नागरिक की जान जा सकती है लेकिन यह यहां कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों को दिखाई नहीं देता।
   आश्चर्य की बात तो ह है कि जब उन आंख और कान रहते हुए भी अंधे और बहरे की भूमिका निभा रहे कर्मचारी को शिकायत करने कोई नागरिक पहूंचता है तो भी उनकी भूमिका और व्यवहार नकारात्मक ही रहता है। ऐसा लगता है मानों ऐसे कर्मचारी सिर्फ कुर्सी तोड़ने के लिए और अवैध वसूली करने के साथ-साथ सरकार से हराम की पगार खाने के लिए ही नियुक्त हुए हैं। ऐसे में सवाल यह उ'ता है कि ऐसे निकम्मे और हराम की पगार लेनेवाले हरामखोर कर्मचारियों के अधिकारी क्या कर रहें हैं? क्या वे भी अंधे और बहरे हो चुके हैं। ऐसा स्थानीय नागरिकों का कहना है। मिली जानकारी के अनुसार जूचंद्र गांव स्थित हसोबा मंदिर के पास कई घरों के पास बिजली के तार खरतनाक स्थिति में लटके हुए हैं। इस बात की शिकायत करने जब एक स्थानीय रहिवासी विद्युत मंडल के कार्यालय में जाकर लटके तारों को  ठीक करने का आग्रह किया तो एक कर्मचारी ने बदतमीजी करते हुए शिकायतकत्र्ता से कहा कि जब मेरी मर्जी होगी तब  ठीक करूंगा। ज्यादा जल्दी है तो खुद ही  ठीक करवा लो। उस बेशर्म कर्मचारी अथवा अधिकारी ने अपना नाम भी बताने से साफ मना कर दिया।​

शनिवार, 21 फ़रवरी 2015

प्रेमी ने माथे पर किया चुंबन, पुलिस ने बना दिया दुष्‍कर्म का आरोपी

(पीएमएस संवाददाता / इंदौर) 
नाबालिग से दुष्कर्म और अपहरण के एक मामले में शुक्रवार को जिला कोर्ट में सुनवाई हुई। सवाल-जवाब के दौरान नाबालिग ने खुलासा किया कि वह युवक से प्रेम करती थी और प्रेमी ने सिर्फ उसके माथे पर चुंबन किया था। माता-पिता के दबाव में उसने प्रेमी के खिलाफ बयान दर्ज कराए थे। पुलिस ने प्रेमी के खिलाफ दुष्कर्म और अपहरण का केस दर्ज किया है। वह तीन माह से जेल में है।
स्पेशल जज सविता सिंह की कोर्ट में शुक्रवार को आरोपी धरमपाल (22) की पेशी थी। सुनवाई में 17 वर्षीय पीड़िता भी पहुंची। बयान शुरू हुए तो पीड़िता ने स्वीकारा कि आरोपी ने उससे गलत काम किया था। आरोपी के वकील महेंद्र मौर्य ने सवाल-जवाब किए तो मामला प्रेम-प्रसंग का निकला। बाद में पीड़िता ने स्वीकार किया कि उसने माता-पिता के दबाव में झूठी रिपोर्ट लिखाई थी। उसने स्पष्ट किया कि 'गलत काम' का मतलब बलात्कार या दुष्कर्म नहीं होता। प्रेमी ने माथे पर चुंबन किया था, जिसे पुलिस और परिजन ने मिलकर दुष्कर्म के केस में बदल दिया।
ये है मामला
पुलिस ने बेटमा थाना क्षेत्र के 22 वर्षीय धरमपाल को 17 वर्षीय लड़की के अपहरण और दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किया। उस पर धारा- 376, 363 व 366 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। आरोपी के खिलाफ फास्ट्र ट्रेक कोर्ट में चालान पेश हुआ।
कोर्ट में पीड़िता का बयान
धरमपाल ने शारीरिक संबंध नहीं बनाए थे। मैं उससे तीन साल से प्रेम करती थी। मैंने कई बार उससे शादी के लिए कहा लेकिन वह मेरे बालिग होने पर शादी के लिए कहता रहा। दिवाली के दो दिन बाद मैं उसके घर गई और भाग चलने के लिए दबाव बनाया। उसने प्रेमवश मेरे माथे पर चुंबन किया और घर जाने को कहा। मैं अकेली उज्जैन चली गई। इसी बीच माता-पिता ने धरम के खिलाफ रिपोर्ट लिखवा दी। पुलिस के सामने गई तो माता-पिता के दबाव में गलत काम करने की बात कही।

शनिवार, 24 जनवरी 2015

महिला आयोग की तरह पुरुष आयोग भी बने?

नई दिल्ली। क्या महिला आयोग की तरह पुरुष आयोग भी होना चाहिए? ये सवाल उठा है उत्तर प्रदेश के आईपीएस ऑफीसर अमिताभ ठाकुर की एक याचिका के बाद। ठाकुर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दाखिल कर मांग की है कि पुरुष आयोग गठित किया जाए। इस आयोग में पुरुष अपने साथ हो रहे अत्याचार और उत्पीड़न की शिकायत लेकर जाएंगे। ठाकुर की मानें तो ऊंचे पदों पर पहुंचने वाली महिलाएं अपने जानबूझ कर सहकर्मी पुरुषों का उत्पीड़न कर रही हैं।

ये हैं यूपी काडर के वरिष्ठ आईपीएस अफसर डाक्टर अमिताभ ठाकुर। मौजूदा वक्त में आईजी नागरिक सुरक्षा के पद पर तैनात हैं। अफसर होते हुए भी अमिताभ ठाकुर अपनी जनहित याचिकाओं के चलते चर्चा में रहते हैं। इस बार उन्होंने याचिका दायर कर मांग की है कि केंद्र और राज्य सरकारें पुरुष आयोग का गठन करें ताकि महिलाओं से परेशान और उत्पीड़ित पुरुषों को इंसाफ मिले। ठाकुर ने याचिका में कहा है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं का उत्पीड़न काफी ज्यादा है लेकिन तमाम ऐसे मामले भी सामने आ रही हैं जिसमें बदलते परिवेश में प्रभावशाली हैसियत वाली महिलाएं भी पुरुषों का उत्पीड़न कर रही हैं।

दरअसल अमिताभ ठाकुर खुद एक केस हिस्ट्री हैं। वो अपनी ही एक सीनियर अफसर से पीड़ित हैं, तमाम शिकायतों के बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। ठाकुर का ये भी मानना है कि पुरुष अधिकारियों को अपने मातहत काम करने वाली महिलाओं से भी झूठे आरोपों का डर बना रहता है।

अमिताभ ठाकुर का कहना है कि मेरे अंडर में भी तमाम महिलाएं काम करती हैं, जिससे असुरक्षा की भावना बनी रहती है। मेरे इस कदम के बाद लोग मेरा समर्थन कर रहे हैं। फेसबुक और ट्वीटर पर लोग मुझसे जुड़ रहे हैं। जिस तरह से महिला और एससीएसटी आयोग है वैसे ही पुरुष आयोग भी होना चाहिए। ताकि महिलाओं द्वारा उत्पीड़ित पुरुषों को संवेदनशीलता के साथ आयो सुनवाई करे।
फेसबुक और ट्वीटर पर ही नहीं अमिताभ ठाकुर को घर में भी समर्थन मिल रहा है। उनकी पत्नी और सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर जो तकरीबन हर संवेदनशील मुद्दे पर जनहित याचिका और आरटीआई दाखिल करती रहती हैं। इस मामले में नूतन ठाकुर भी अपने पति के साथ खड़ी हैं और इस आयोग के गठन को जरूरी बता रही हैं।

फिलहाल ये एक बहस का विषय है कि क्या पुरुष इस हालत में है कि उसका कोई उत्पीड़न कर सके। हाल ही में मुंबई में एक व्यक्ति को इसी आधार पर तलाक मिल गया कि वो अपनी पत्नी से पीड़ित था। उसकी शिकायत थी कि पत्नी उससे अत्यधिक यौन संसर्ग की अपेक्षा करती थी। अदालत ने इस मामले को उत्पीड़न की तरह देखते हुए तलाक दे दिया।